दसिी ोंकक्षा प्रवतदशा प्रश्पत् 7 अोंक 80
विषय: तृतीय भाषा वहोंदी
खंड ‘ि’
I॰ वनम्नवलक्लखत प्रश्ो ोंके चार-चार विकल्प वदए गए हैं|जीनामे एक मात् सही उत्तर है सही उत्तर
चुनकर प्रश्ो ोंके नीचे वदए हुये ररक्त थथानो ोंमे सोंके ताक्षर सवहत पूणा रूप से वलक्लखए : 1X8=8
1. इनमें से एकिचन शब्द है
A.पुस्तकें B.बच्ा C.र्ोसोंले D. आोंखे
2. उवचत शब्द का विलोम शब्द है –
A.अनुवचत B. अननुवचत C. सुवनवश्चत D. यकवश्चत
3. ‘उठना’ शब्द का प्रथम प्रेरणाथाक रूप है ----
A. उठ B. उठाना C. उठिाना D. उठ जाना
4. ‘परोपकार’ इस सोंवि का उदाहरण है ------
A. दीर्ा सोंवि B. गुणसक्लन्ध C. यण सोंवि D.िृक्लद्ध सोंवि
5. ‘गोंगा वहमालय से वनकलती है’ रेखाोंवकत शब्द में कारक है ------
A. अपादान B. अविकरण C. सोंबोंि D. कमा
6. ‘क्या आप मैसूर जा रहे है ? इस िाक्य में प्रयुक्त विराम वचन्ह है -----
A. अल्प विराम B. प्रश् वचन्ह C. पूणा विराम D. अिा विराम
7. ‘सुख -दु:ख ’ शब्द इस समास का उदाहरण है --
A.बवहविही B. वद्वगु C. तत्पुरुष D. कमा िारय
8. ‘फू ला नही समाना‘िाक्य इस मुहािरे का अथा है ------
A.बहुत खुश होना B. हानी पहुोंचाना C.शोर मचाना D.नौकरी छीनना
खंड ‘ ख ‘
II॰ कनम्न कलखखत प्रथम दो शब्ो ंिे सूकचत संबंधो ंिे अनुरूप तीसरे शब् िा संबंकधत शब् कलखखए:
9. कनाल : खुल्लर : :मेजर : ___________________ 1X4=4
10.सूरदास : कृ ष्णभक्लक्त शाखा :: तुलसी दास: ___________________
11.िीवडयो कान्फरेंस : विचार-विवनमय :: ई-गिनासा :__________________
12. कनााटक : चोंदन का आगार : : बेंगलूरु : : ______________________
III. कनम्न कलखखत प्रश्नो ंिा उत्तर एि-एि वाक्य में कलखखए : 4X1=4
13.आिुवनक पुरुष ने वकस पर विजय पाया है ?
14.कलाम जी के जीिन में दुलाभ िास्तुएूँ क्या थी?
15.लेखक को कहाूँ ठहराया गया ?
16.कवि वकस पर विश्वास करने को कहते हैं ?
IV.कनम्न कलखखत प्रश्नो ंिे उत्तर दोया तीन वाक्यो ंमें कलखखए : 8X2=16
17.दुकानदार ने लेखक से क्या कहा ?
18.फू ल मालाएूँ वमलने पर लेखक क्या सोचने लगे ?
19.वबछेंद्री के माता वपता कौन थे ?
20.कश्मीरी सेब पाठ से क्या सीख वमलती है ?
21.वदनकर जी के अनुसार मानि का सही पररचय क्या है ?
22.समय का सदुपयोग कै से करना चावहए ?
23.शनै:चर का अथा क्या है ?शवन वकसका पुत् है ? या
शवन का वनमााण कै से हुआ ?
24.सत्य के बारे में गाोंिी जी का कथन क्या है ? अथिा
असत्य बोलने का पररणाम क्या होता है ?
V . कनम्न कलखखत प्रश्नो ंिा उत्तर तीन-चार वाक्यो ंमे कलखखए : 9X3=27
25. वगल्लू के काया-कलाप के बारे में वलक्लखए ?
26. शोंशुद्दीन अखबारो ोंका वितरण काया कै से करते थे ?
27. बसोंत ईमानदार लड़का है कै से ?
28.सोंचार ि सूचना क्षेत् में इन्टरनेट का क्या महत्व है ?
29.मवहला की साहस गाथा पाठ से क्या सोंदेश वमलता है ?
30.मातृभूमी के स्वरूप के बारे में वलक्लखए |
31.यशोदा कृ ष्ण के क्रोि को कै से शाोंत करती है ?
32.दोहे का भािाथा अपने शब्दो ोंमें वलक्लखए |
दया िमा का मूल है,पाप मूल अवभमान |
तुलसी दया न छावढए जब लग र्ट में प्राण ||
33.गदयाोंश का अनुिाद कन्नड या अोंग्रेज़ी में कीवजए :
दोनो ोंदोस्त आगे बढ़े | रास्ते में उन्हे साूँप वमला | दोस्तो ोंने साूँप को रोका |
VI. वनम्न वलक्लखत प्रश्ो ोंका उत्तर पाूँच –छ: िाक्यो ोंमें वलक्लखए : 2X4=8
34.कनााटक की वशल्पकला का िणान कीवजए |
अथिा
कनााटक के प्राकृ वतक सौन्दया का िणान कीवजए ?
35. वनम्न वलक्लखत कविताोंश को पूणा कीवजए :
असफलता __________________________________
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_______________________________________भागो तुम |
खंड ‘ग ‘
VII. 36) गदयाोंश को ध्यान पूिा पढ़कर वनम्न वलक्लखत प्रश्ो ोंका उत्तर वलक्लखए : 1X4=4
पुराणो ोंमें नदी को अवि देिता की सोलहिी ोंपवियो ोंमें से एक बताया है |कनााटक प्राोंत कू गा के पास ब्रहमवगरी पिात पर चोंद्रतीथा ही इस नदी का उद्गम थथल है |रािण के भाई वतशीश का वतरुवचनापल्ली नगर भी इसकी पवश्चम तट पर आबाद है | सरी रोंगम थथल से कािेरी दो िाराओ ोंमें विभक्त हुई है | उनके मध्य तीन द्वीप बन गये है-आवद रोंगम,मध्य रोंगम,अोंत रोंगम|
क) पुराणो ोंमे नदी को वकस देिता की पिी माना गया है ? ख) कू गा के पास कौन-सा पिात है ? ग) रािण के भाई का नाम क्या है ?
र्) कािेरी वकतनी िाराओ ोंमे विभक्त हुई हैं?
VIII.37) शैवक्षक पयाटन के वलए अनुमवत एिों 500 रू पैसे माूँगते हुए अपने वपता के नाम पत् वलक्लखए|
या 1X5=5
बीमारी का कारण देते हुए चार वदन की छुट्टी माूँगकर अपने प्रिान अध्यापक के नाम छुट्टी पत् वलक्लखए|
IX. 38) वदये गए सोंके त वबन्दुओ ों के आिार पर वकसी एक विषय पर 12-15 िाक्यो ों मे वनबोंन्ध वलक्लखए 1X4=4
1.इन्टरनेट 2. पयाािरण नागरीको ोंका कताव्य
* प्रस्तािना * प्रस्तािना * प्रस्तािना
* महत्व * उपयोवगता * नागरीको ोंकी भूवमका
* लाभ ि हानी * लाभ * महत्व
* उपसोंहार * रक्षा के उपाय * वनष्कषा
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